Sunday, 13 June 2021

अयोध्या को बनाएँगे धार्मिक, वैदिक और सोलर शहर- प्राचीन विरासत के साथ आधुनिकता का संगम: CM योगी

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा की है कि राज्य सरकार अयोध्या को एक धार्मिक, वैदिक और सोलर सिटी के रूप में विकसित करेगी। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखने वाली अयोध्या एक वैश्विक पर्यटन स्थल बनने के साथ एक समावेशी शहर के रूप में विकसित होगी।

शनिवार (12 जून) को मुख्यमंत्री निवास में अयोध्या के लिए विजन डॉक्यूमेंट के प्रेजेंटेशन के दौरान यह निर्णय लिया गया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में जल स्रोतों के संरक्षण, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, पशु संरक्षण, आउटर रिंग रोड का निर्माण, सोलर प्रोजेक्ट, वृक्षारोपण और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने के प्रोजेक्ट पर प्राथमिकता से काम शुरू किया जाएगा। सनातन संस्कृति पर आधारित यह शहर प्राचीन सभ्यता, विरासत और परंपरा पर आधारित यह शहर आधुनिक समावेशी सुविधाओं के साथ सामंजस्य में विकसित होगा।

रामजन्मभूमि सिटी प्लान :

सीएम आदित्यनाथ ने शहर में यूटिलिटी पासेज बनाने का आदेश दिया है ताकि बार-बार अंडरग्राउंड केबल और पाइपलाइन के लिए सड़कों को न खोदना पड़े। उन्होंने यह भी आदेशित किया है कि शहर में हेरिटेज लाइटिंग की जाए। साथ ही पंच कोसी, चौदह कोसी और चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग का विकास उनके धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया जाए। पर्यटन विभाग को ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों की पहचान करने और उनका विकास करने के लिए भी आदेशित किया जा चुका है।

सीएम आदित्यनाथ द्वारा अधिकारियों को यह कहा गया है कि राम मंदिर रोड के चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण करने से पहले दुकानदारों और स्थानीय निवासियों की अनुमति ली जाए और उनके लिए उचित प्रबंध किया जाए। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय के विषय में सीएम योगी आदित्यनाथ का मानना है कि संग्रहालय इस प्रकार बनाया जाना चाहिए कि उसमें आधुनिकता के साथ ऐतिहासिक गर्व का संयोजन हो। साथ उन्होंने गेस्ट हाउस और विभिन्न अन्य संस्थानों के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण का भी आदेश दिया है। इसके अलावा सरयू नदी और उसके घाटों के सौंदर्यीकरण की योजना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

श्रीराम मंदिर की नींव का कार्य अक्टूबर तक में होगा पूर्ण :

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने यह घोषणा की है कि राम मंदिर के निर्माण के लिए पत्थरों को जोड़ने का कार्य इसी साल दिसंबर से शुरू हो जाएगा। हाल ही में प्राप्त सूचनाओं के आधार पर मंदिर की 50 फुट गहरी, 400 फुट लंबी और 300 फुट चौड़ी नींव की भराई का कार्य चल रहा है जो कि इस साल अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण का निर्माण कार्य शुरू होगा जिसमें मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को आपस में जोड़ने का कार्य शामिल है।

राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने कहा कि दिसंबर में मंदिर के आधार निर्माण का कार्य शुरू होगा। जिसके लिए मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरों का ऑर्डर दे दिया गया है और उन्हें तराशने का काम भी जल्दी ही शुरू कर दिया जाएगा।

https://hindi.opindia.com/national/plan-to-develop-ayodhya-as-religious-vedic-and-solar-powered-city/

Monday, 26 November 2018

अयोध्या रामजन्मभूमि ! २ लाख की भीड, संत जुटे, १९९२ के बाद अयोध्या में पहली बार ऐसा

अयोध्या : राम मंदिर के लिए विश्व हिंदू परिषद (विहिंप) की धर्मसभा और शिवसेना के मेगा शो से एक दिन पहले अयोध्या किले में तब्दील है। पुलिस-प्रशासन मुस्तैद है और अयोध्यावासी थोड़ा आशंकित ! दावा है कि रविवार को अयोध्या में करीब दो लाख लोग जुटेंगे। इसमें १ लाख आरएसएस, १ लाख विहिंप और करीब ५ हजार शिवसेना के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। १९९२ में बाबरी ढांचे को ढहाए जाने के बाद अयोध्या में यह सबसे बड़ा जमावड़ा माना जा रहा है। बता दें कि मुंबई से शिवसैनिक दो दिन पहले से अयोध्या का रुख कर चुके थे, जबकि पार्टी चीफ उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे चार्टर्ड विमानों से आज दोपहर अयोध्या पहुंचेंगे।

धारा १४४ के घेरे में अयोध्या

अयोध्या में इतनी बड़ी तादाद में इस मूवमेंट के मद्देजर पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। अर्द्धसैनिक बलों के जवान, राज्य का खुफिया विभाग और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शुक्रवार से ही शहर में मौजूद हैं। शहर को आठ जोनों और १६ सेक्टर्स में बांटा गया है। शहर में पीएसी की २० कंपनियां, अर्द्धसैनिक बल की सात और रैपिड ऐक्शन फोर्स की दो कंपनियों को तैनात किया गया है। अल्पसंख्यक परिवारों में असुरक्षा की खबरों के बीच पूरे अयोध्या में धारा १४४ लगा दी गई है। राज्य सरकार की ओर से लखनऊ जोन के एडीजी आशुतोष पांडेय और झांसी रेंज के आईजी एसएस बघेल को सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए भेजा गया है।

आरएसएस के एक लाख कार्यकर्ता पहुंचेंगे अयोध्या

आरएसएस के एक वरिष्ठ प्रचारक ने वाराणसी ने कहा, ‘करीब १,३२२ बसों और १,५४६ फोर वीलर्स में ८० हजार वर्करों को लाया जाएगा। १४ हजार वर्कर मोटरसाइकल और करीब १५ हजार वर्कर ट्रेन के जरिए अयोध्या पहुंचेंगे !’ सूत्रों का कहना है कि इन दोनों संगठनों में से करीब एक लाख आरएसएस और इतने ही विश्व हिंदू परिषद कार्यकर्ता रविवार को अयोध्या में जुटनेवाले हैं। इनके अलावा बड़ी संख्या में साधु-संत भी यहां जुटेंगे। विश्व हिंदू परिषद के आयोजकों का कहना है कि वे रविवार के आयोजन के लिए फूड पैकेट्स तैयार कर रहे हैं। इस आयोजन में बड़ी संख्या में जुटकर मेगा-शो से २०१९ लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की बीजेपी सरकार पर अध्यादेश लाकर राम मंदिर निर्माण का दबाव डालने की तैयारी है।

शिवसेना भी दिखाएगी ताकत

शिवसेना भी इस मेगा शो में अपना ताकत प्रदर्शन करनेवाली है। ठाणे से पांच ट्रेनों से करीब ३-४ हजार कार्यकर्ता अयोध्या पहुंच रहे हैं। अयोध्या शिवसेना के भगवे झंडे से पट गया है। दो दिन के इस कार्यक्रम में पार्टी के २२ सांसद और ६२ विधायकों के भी यहां पहुंचने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम के लिए पार्टी ने एक महीने पहले ही अयोध्या और उसके आसपास को होटलों को बुक कर लिया था।

३००० मुस्लिम भी पहुंचेंगे

शहर में अल्पसंख्यक समुदाय के डरे होने की खबरों के बीच धारा १४४ लागू कर दी गई है। धर्मसभा में मुस्लिम भी पहुंचेंगे, जिसका जिम्मा संघ ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच को सौंपा है। मंच से जुड़े और सुन्नी सोशल फोरम के संयोजक रईस खान कहते हैं कि हमारे पास करीब ३००० लोगों की सूची है, जो धर्मसभा में शामिल होंगे। राम हमारे नबी हैं। हम बसों से लोगों को ले जा रहे हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं।

सुरक्षा को प्रशासन मुस्तैद

कमिश्नर डीएम डीआईजी व सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में हर हाल में लॉ ऐंड ऑर्डर को बनाए रखने की रणनीति बनी है। प्रभारी एसएसपी संजय कुमार ने बताया कि राम जन्म भूमि परिसर के चारों तरफ त्रिस्तरीय बैरीकेडिंग करवाई गई है। इसके चारों तरफ विडियो कैमरे सीसी कैमरे, ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है। ४७ कंपनी पीएसी व सिविल पुलिस अयोध्या में तैनात कर दी गई है। पूरी सख्ती के साथ चेकिंग अभियान भी चल रहा है।

पहले मंदिर फिर सरकार के पोस्टर

अयोध्या व फैजाबाद नगरों में शिवसेना के ‘पहले मंदिर फिर सरकार’ का स्लोगन लिखे करीब १५० बड़ी छोटी होर्डिंग व पोस्टर कटआउट लग गए हैं। पोस्टरों में लिखे स्लोगनों को देखकर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। वहीं, धर्म सभा को लेकर विहिंप व संघ परिवार तैयारी पूरी करने में जुटा है। १३ से ज्यादा पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। सुरक्षा, भोजन, यातायात व आवास समितियों के प्रभारियों का कहना है धर्मसभा की व्यवस्था अब अंतिम चरण में है।

रामलला के दर्शन पर कोई रोक नहीं

डीएम डॉ. अनिल कुमार पाठक के मुताबिक दर्शन पर किसी तरह से रोक नहीं है, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर सीमित संख्या में लोगों को विवादित परिसर में विराजमान रामलला के दर्शन करने के लिए भेजा जाएगा। वहीं कमिश्नर मनोज मिश्र ने लॉ ऐंड ऑर्डर बनाए रखने के साथ ही सख्त व मजबूत व्यवस्था भी बनाए रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। अयोध्या में २३ नवम्बर से लेकर २५ नवम्बर तक सुरक्षा को लेकर छावनी जैसी व्यवस्था बनाई गई है।
स्त्रोत : नवभारत टाईम्स

उत्तर प्रदेश : राम मंदिर के पक्ष में उतरीं मुस्लिम महिलाएं, ‘कसम खुदा की खाते हैं मंदिर वहीं बनवाएंगे’ !

मेरठ में रविवार को मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की सह संयोजक शाहीन परवेज के आवास पर अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में शामिल मुस्लिम महिलाओं ने अयोध्या के मौजूदा हालात पर विचार-विमर्श किया। बैठक के दौरान शाहीन ने कहा कि यह देश हमारा है, हम देश के मसलों को एकजुट होकर निपटाएंगे। इस मौके पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने आह्वान करते हुए कहा कि कसम खुदा की खाते हैं मंदिर वही बनवाएंगे। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि के लिए हमारा फर्ज बनता है कि हम अपने हिंदू भाई-बहनों को खुशी से राम मंदिर निर्माण के लिए सहमति दें !
इस मामले में राष्ट्रीय एकता मिशन की कार्यकारिणी सदस्य सुबुही खान ने कहा श्रीराम मंदिर हमारी सनातन संस्कृति का प्रतीक है। हम लोग तन-मन-धन के साथ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में सहयोग करेंगे। महिलाओं ने कहा राम मंदिर को लेकर मुस्लिम पुरुषों का रुख साफ नहीं है !
अयोध्‍या में राम मंदिर निर्माण को लेकर विहिप की ओर से आयोजित धर्मसभा को लेकर नेपाल बार्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियां भी पूरी तरह से सतर्क हैं। वहीं, भारतीय पुलिस के साथ नेपाल में तैनात प्रहरी भी हर आने-जानेवाले लोगों की जांच कर रहे हैं। बता दें कि अयोध्‍या में आयोजित धर्मसभा में दो लाख से अधिक लोगों के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि यूपी के साथ बार्डर पर भी हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है !
स्त्रोत : न्यूज 18

Tuesday, 2 October 2018

ବିବାଦୀୟ ଅଯୋଧ୍ୟା


ଅଯୋଧ୍ୟାଏକ ମହାବିବାଦୀୟ ପ୍ରସଙ୍ଗ ରୂପେ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବିଚଳିତ ଓ ବିବ୍ରତ କରିରଖିଛି । ସାଂପ୍ରଦାୟିକ ସଦଭାବନାରେ ବିଶ୍ୱାସ ରଖୁôଥିବା ଭାରତବର୍ଷରେ ଏହି ପ୍ରସଙ୍ଗ ନେଇ ଏକ ଫର୍ମୁଲା ବାହାରିବ ବୋଲି ଆଶା କରାଯାଉଛି । ସ୍ୱାଧୀନତା ପୂର୍ବରୁ ସାମ୍ପ୍ରଦାୟିକ ବିବାଦର କେନ୍ଦ୍ର ପାଲଟିଥିବା ଅଯୋଧ୍ୟାର ବିବାଦୀୟ ପୀଠର ମାଲିକାନା ନେଇ ଚାଲିଥିବା ମାମଲା ସମାଧାନ ପାଇଁ ଏବେ ରାସ୍ତା ଖୋଲିଥିବା କୁହାଯାଉଛି । ଅଯୋଧ୍ୟାର ବିବାଦୀୟ ସ୍ଥାନ ଯାହାକୁ କେତେକ ରାମ ଜନ୍ମଭୂମି ବୋଲି ଦାବି କରୁଛନ୍ତି ଏବଂ ଦ୍ୱାଦଶ ଶତାବ୍ଦୀରେ ମୋଗଲ ସମ୍ରାଟ୍ ବାବର ଏଠାରେ ପୁରାକାଳରୁ ଥିବା ମନ୍ଦିରକୁ ଭାଙ୍ଗି ମସଜିଦ୍ ନିର୍ମାଣ କରିଥିଲେ ବୋଲି କୁହାଯାଉଛି ତାହାର ମାଲିକାନା ନେଇ ହିନ୍ଦୁ ଓ ମୁସଲମାନ ଧର୍ମର ଦୁଇ ଗୋଷ୍ଠୀ ମଧ୍ୟରେ ବିବାଦ ଦୁଇ ସମ୍ପ୍ରଦାୟ ମଧ୍ୟରେ ତିକ୍ତତାର ଚରମସୀମାରେ ଉପନୀତ ହେବା ସତ୍ତେ୍ୱ ଏହାର ସମାଧାନ ରାସ୍ତା ବାହରି ପାରିନାହିଁ । ରାଜନୈତିକ ସ୍ତରରେ ଏହାର ସମାଧାନ ରାସ୍ତା ବାହାରି ନପାରିବା ଫଳରେ ମାମଲାକୋର୍ଟକୁ ଯାଇଥିଲା । କେତେକ ଏହାକୁ ଧାର୍ମିକ ବିବାଦର ମାନ୍ୟତା ଦେଇଛନ୍ତି । କିନ୍ତୁ ନିକଟରେ ମାନ୍ୟବର ସୁପ୍ରିମକୋର୍ଟ ଏହାକୁ ଖାରଜ କରି ଏହା କେବଳ ଏକ ଜମି ବିବାଦ ବୋଲି ସ୍ପଷ୍ଟ କରିଛନ୍ତି । ଅଯୋଧ୍ୟାର ଏହି ତଥାକଥିତ ମସଜିଦ୍ରେ ନମାଜ ପାଠ କରାଯାଉନଥିଲା । କେବଳ ଏକ ମସଜିଦ୍ର ଢାଞ୍ଚା ଥିଲା ଯାହାକୁ କରସେବକମାନେ ବଳପୂର୍ବକ ଭାଙ୍ଗିଦେଇଛନ୍ତି । ଏଠାରେ ଏକ ରାମ ମନ୍ଦିର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ବିଶ୍ୱ ହିନ୍ଦୁ ପରିଷଦ ପରିଷଦ, ରାଷ୍ଟ୍ରିୟ ସ୍ୱୟଂ ସେବକ ସଂଘ ଆଦି ହିନ୍ଦୁ ସଙ୍ଗଠନ ପକ୍ଷରୁ ଦାବି କରାଯାଇଆସୁଛି । କିନ୍ତୁ ମୁସଲମାନ ମାନେ ଏହି ଜମି ଉପରେ ସେମାନଙ୍କର ଅଧିକାର ଥିବା ଦାବି କରି ଆସୁଛନ୍ତି । ତେଣୁ ସୁପ୍ରିମକୋର୍ଟ ବା ପୂର୍ବରୁ ଆହ୍ଲାବାଦ୍ ହାଇକୋର୍ଟ ଯଥାର୍ଥରେ ଏହାକୁ ଏକ ଜମି ବିବାଦ ବୋଲି କହିଛନ୍ତି । ଏହା ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବେ ଏକ ସିଭିଲ୍ କେସ୍ । ଏଥିରେ ଧର୍ମିୟ ଭାବନାର କୋ÷ଣସି ସ୍ଥାନ ନାର୍ହି । ଏହାକୁ ନେଇ ନିର୍ଦ୍ଦିଷ୍ଟ ଗୋଷ୍ଠୀ ମଧ୍ୟରେ ବିବାଦ ରହିଛି । କିନ୍ତୁ ସାମଗ୍ରୀକଭାବେ ହିନ୍ଦୁ-ମୁସଲମାନ ବିବାଦର କୋ÷ଣସି ସୂଯୋଗ ନାହିଁ । ମାନ୍ୟବର ସୁପ୍ରିମକୋର୍ଟ ଏହାକୁ ସ୍ପଷ୍ଟ କରିଛନ୍ତି । ନମାଜ୍ ପାଠ ପାଇଁ ମସଜିଦ୍ ଜରୁରୀ ନୁହେଁ । ଯେ କୋ÷ଣସି ସ୍ଥାନରେ ଏହା ପାଠ କରାଯାଇପାରିବ । ଏହା କହିଛନ୍ତି ସୁପ୍ରିମକୋର୍ଟ । ଗୁରୁବାର ଦିନ ଅଯୋଧ୍ୟାର ବିବାଦୀୟ ଜମି ସମ୍ପର୍କିତ ଏକ ମାମଲାର ରାୟ ପ୍ରକାଶ କରି ପ୍ରଧାନ ବିଚାରପତି ଜଷ୍ଟିସ୍ ଦୀପକ ମିଶ୍ରଙ୍କ ଅଧ୍ୟକ୍ଷତାରେ ଗଠିତ ୩ଜଣିଆ ଖଣ୍ଡପୀଠ କହିଛନ୍ତି ଯେ, ନମାଜ ସହ ଇସଲାମର କୋ÷ଣସି ସମ୍ପର୍କ ନାହିଁ । ଯେ କୋ÷ଣସି ସ୍ଥାନରେ ଏହା ପାଠ କରାଯାଇପାରିବ । ଅଯୋଧ୍ୟାର ବିବାଦୀୟ ସ୍ଥାନରେ ନମାଜ ପାଠ ପାଇଁ ଅନୁମତି ଦେବାକୁ ଏବଂ ଏହି ସ୍ଥାନ ନମାଜ ପାଇଁ ଉଦ୍ଦିଷ୍ଟ ବୋଲି ଦାବି କରି ଯେଉଁ ପିଟିସନ୍ ଦାଖଲ ହୋଇଥିଲା ତାହାକୁ ମାନ୍ୟବର ସୁପ୍ରିମକୋର୍ଟ ଖାରଜ କରିଛନ୍ତି । ଏହା କେବଳ ଏକ ଜମି ବିବାଦ ଏବଂ ଏହା ସହିତ ଇସଲାମ ବା ନମାଜର କୋ÷ଣସି ସମ୍ପର୍କ ନାହିଁ । ୨୦୧୦ରେ ଆହ୍ଲାବାଦ୍ ହାଇକୋର୍ଟ ଅଯୋଧ୍ୟା ମାମଲାର ଯେଉଁ ରାୟ ଦେଇଥିଲେ ତା ବିରୋଧରେ ଆଗତ ପିଟିସନର ଶୁଣାଣୀ ୩ଜଣିଆ ବେଞ୍ଚ କରିବେ । ଏହାର ଶୁଣାଣୀ ଏକ ବୃହତ୍ତର ବେଞ୍ଚରେ କରିବାକୁ ଯେଉଁ ଆବେଦନ ହୋଇଥିଲା ତାହକୁ ସୁପ୍ରିମକୋର୍ଟ ଖାରଜ କରିବା ସହିତ ପୂର୍ବ ନିଷ୍ପତ୍ତି ଅନୁଯାୟୀ ଏହି ମାମଲାର ଶୁଣାଣୀ ୩ଜଣିଆ ବେଞ୍ଚରେ ହେବ ବୋଲି ସୁପ୍ରିମକୋର୍ଟ କହିଛନ୍ତି । ଆସନ୍ତା ୨୯ରୁ ମାମଲାର ଶୁଣାଣୀ ଆରମ୍ଭ ହେବ ବୋଲି କୋର୍ଟ କହିଛନ୍ତି । ସୁପ୍ରିମକୋର୍ଟ ୧୯୯୪ ରାୟର ପୁନର୍ବିଚାର ଆବେଦନକୁ ମଧ୍ୟ ଖାରଜ କରିଛନ୍ତି । ଫଳରେ ଅଯୋଧ୍ୟା ବିବାଦର ଫଇସଲା ପାଇଁ ରାସ୍ତା ଫିଟିଛି ବୋଲି କୁହାଯାଉଛି । ଇସମାଇଲ୍ ଫାରୁକୀଙ୍କ ପକ୍ଷରୁ ଆଗତ ପିଟିସନ ଉପରେ ନିଜର ମତ ବ୍ୟକ୍ତ କରି ଜଷ୍ଟିସ୍ ମିଶ୍ର ଓ ଜଷ୍ଟିସ୍ ଅଶୋକ ଭୂଷଣ କହିଛନ୍ତି ଯେ, ଏହା ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣଭାବେ ଏକ ଜମି ବିବାଦ । ଏଥିରେ କୋ÷ଣସି ଧାର୍ମିକ ରୀତିନୀତିର ସମ୍ପୃକ୍ତି ନାହିଁ । ତେବେ ତିନିଜଣିଆ ବେଞ୍ଚର ଅନ୍ୟତମ ସଦସ୍ୟ ଜଷ୍ଟିସ୍ ଏସ ନଜିର ଅନ୍ୟ ଦୁଇଜଣଙ୍କ ମତ ସହ ଏକମତ ହୋଇପାରିନଥିଲେ । ସେ ଏହି ମାମଲାର ଗୁରୁତ୍ୱ ଓ ଗମ୍ଭୀରତା ଦୃଷ୍ଟିରୁ ଏହାକୁ ଏକ ବ୍ୟାପକ ଓ ସଂପ୍ରସାରିତ ବେଞ୍ଚରେ ଶୁଣାଣୀ ସପକ୍ଷରେ ମତ ବ୍ୟକ୍ତ କରିଥିଲେ । ସୁପ୍ରିମକୋଟଙ୍କ ଏହି ରାୟକୁ ବିଜେପି ଓ ସଂଘ ପରିବାର ପକ୍ଷରୁ ସ୍ୱାଗତ କରାଯିବା ସହିତ ଏହା ଦ୍ୱାରା ବିବାଦର ସମାଧାନ ପନ୍ଥା ଶୀଘ୍ର ନିର୍ଦ୍ଧାରିତ ହେବ ବୋଲି ଆଶା ବ୍ୟକ୍ତ କରାଯାଇଛି । ୟୁପି ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଯୋଗୀ ଆଦିତ୍ୟନାଥ ମଧ୍ୟ ଏହାକୁ ସ୍ୱାଗତ କରି ୨୦୧୯ରେ ବିବାଦର ସମାଧାନ ପନ୍ଥା ନିର୍ଦ୍ଧାରିତ ହୋଇପାରିବ ଏବଂ ଅଯୋଧ୍ୟାରେରାମ ମନ୍ଦିର ନିର୍ମାଣ ସମ୍ଭବ ହୋଇପାରିବ ବୋଲି କହିଛନ୍ତି । ଉଲ୍ଲେଖଯୋଗ୍ୟ ଯେ, ୨୦୧୦ରେ ଆହ୍ଲାବାଦ୍ ହାଇକୋର୍ଟ ଅଯୋଦ୍ୟା ବିବାଦର ସମାଧାନ ପାଇଁ ବିବାଦୀୟ ଜମିକୁ ତିନିଭାଗରେ ବିଭକ୍ତ କରିବାକୁ କହିଥିଲେ । ଗୋଟିଏ ଭାଗ ରାମମନ୍ଦିର ନ୍ୟାସକୁ, ଗୋଟିଏ ଭାଗ ମୁସଲମାନ ଗୋଷ୍ଠୀକୁ ଏବଂ ଶେଷ ଭାଗ ସାମାଜିକ କାର୍ଯ୍ୟ ପାଇଁ ଉଦ୍ଦିଷ୍ଟ ରଖିବାକୁ କହିଥିଲେ । ସେତେବେଳେ ଏହାକୁ ଅନେକ ସ୍ୱାଗତ କରିଥିଲେ ଏବଂ ଏତିକିରେ ବିବାଦର ଅନ୍ତ ହେଉ ବୋଲି ମତବ୍ୟକ୍ତ କରିଥିଲେ ।

Thursday, 27 September 2018

ଅକ୍ଟୋବର ୨୯ରୁ ଅଯୋଧ୍ୟା ମାମଲାର ଶୁଣାଣ


ନୂଆଦିଲ୍ଲୀ, ୨୭/୯ : ଦୀର୍ଘ ବର୍ଷ ହେଲା ବିବାଦ ମଧ୍ୟରେ ରହିଥିବା ଅଯୋଧ୍ୟା ଜମି ମାମଲାର ଶୁଣାଣି ଆସନ୍ତା ମାସ ୨୯ ତାରିଖରୁ ଆରମ୍ଭ ହେବ  । ଏହି ମାମଲାର ରାୟ ଖୁବ୍‍ ଶୀଘ୍ର ପ୍ରକାଶ ପାଇବାର ସମ୍ଭାବନା ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଛି  । ଏଥିସହିତ ୧୯୯୪ର ଇସ୍‍ମାଇଲ୍‍ ଫାରୁକୀ ମାମଲାରେ ମାନ୍ୟବର ସୁପ୍ରିମ୍‍କୋର୍ଟଙ୍କ ରାୟର ପୁନର୍ବିଚାର ପାଇଁ ଆଗତ ମାମଲା ୫ ଜଣିଆ ସାମ୍ବିଧାନିକ ପୀଠକୁ ଯିବ ନାହିଁ ବୋଲି ଅଦାଲତ ସ୍ପଷ୍ଟ କରିଛନ୍ତି  । ଏହି ମାମଲାର ପୁନର୍ବିଚାର ର ଆବଶ୍ୟକତା ନାହିଁ ବୋଲି ପ୍ରଧାନ ବିଚାରପତି ଜଷ୍ଟିସ୍‍ ଦୀପକ ମିଶ୍ର, ଜଷ୍ଟିସ ଅଶୋକ ଭୂଷଣ ଏବଂ ଜଷ୍ଟିସ ଏନ୍‍.ନଜିରଙ୍କୁ ନେଇ ଗଠିତ ଖଣ୍ଡପୀଠଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ଜଷ୍ଟିସ ଦୀପକ ମିଶ୍ର ଓ ଅଶୋକ ଭୂଷଣ ଏହି ମାମଲାରେ ଏକମତ ହୋଇଥିଲେ ଯେ, ଯେ କୌଣସି ସ୍ଥାନରେ ନମାଜ ପାଠ କରାଯାଇପାରିବ  । କୌଣସି ଏକ ନିର୍ଦ୍ଦିଷ୍ଟ ସ୍ଥାନରେ ନମାଜ ପାଠ କରିଦେଲେ ତାହା ଅନ୍ୟ କୌଣସି କାର୍ଯ୍ୟରେ ଉପଯୋଗ ହୋଇପାରିବ ନାହିଁ ଏଭଳି କୌଣସି ଧାର୍ମୀୟ ମତ ଗ୍ରହଣଯୋଗ୍ୟ ନୁହେଁ  । ଏହି ମାମଲାର ପୁନର୍ବିଚାର ପାଇଁ ୫ ଜଣିଆ ସାମ୍ବିଧାନିକ ପୀଠକୁ ପଠାଇବା ନିମନ୍ତେ ଯେଉଁ ଆବେଦନ କରାଯାଇଥିଲା ତାହାକୁ ଜଷ୍ଟିସ ନଜିର ସମର୍ଥନ କରିଥିଲେ ମଧ୍ୟ ୨:୧ରେ ଏହା ଗ୍ରହଣଯୋଗ୍ୟ ହୋଇନଥିଲା  । ତେବେ ଜଷ୍ଟିସ ନଜିର କହିଥିଲେ ଯେ, ୨୦୧୦ରେ ଅଯୋଧ୍ୟା ମାମଲାରେ ଆହ୍ଲାବାଦ ହାଇକୋର୍ଟ ଇସ୍‍ମାଇଲ୍‍ ଫାରୁକି ପ୍ରସଙ୍ଗରେ ପ୍ରଭାବିତ ହୋଇ ରାୟ ଦେଇଥିଲେ  । ତେଣୁ ଇସ୍‍ମାଇଲ୍‍ ଫାରୁକି ମାମଲାରେ ଅଦାଲତଙ୍କ ରାୟରପୁନର୍ବିଚାରର ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି  । ସେ ଆହୁରି କହିଥିଲେ ଯେ, କୌଣସି ଧର୍ମର ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଆଚରଣ କ’ଣ ତାହା ସାମ୍ବିଧାନିକ ପୀଠ ବିଚାର କରିବା ଉଚିତ  । ଏହାପରେ ଅଯୋଧ୍ୟା ଜମି ମାମଲାର ଶୁଣାଣି ହେବା ଉଚିତ  । ତେବେ ଜଷ୍ଟିସ ମିଶ୍ର ଓ ଜଷ୍ଟିସ ଭୂଷଣ ଏହାକୁ ଅଗ୍ରାହ୍ୟ କରିଦେଇଥିଲେ  । ସେମାନେ ଦର୍ଶାଇଥିଲେ ଯେ, ଇସ୍‍ମାଇଲ୍‍ ଫାରୁକି ମାମଲାର ରାୟ ଚୂଡ଼ାନ୍ତ ଓ ଏହାର ପୁନର୍ବିଚାରର ଆବଶ୍ୟକତା ନାହିଁ  । ତେଣୁ ଏହି ମାମଲା କୌଣସି ସାମ୍ବିଧାନିକ ପୀଠକୁ ଯାଇପାରିବ ନାହିଁ  । ଏଥିସହିତ ଅଦାଲତ ଅଯୋଧ୍ୟା ଭୂମି ମାମଲାରେ ପୂର୍ବରୁ ସମ୍ପୃକ୍ତ ଥିବା ୩ ଜଣ ପକ୍ଷଙ୍କୁ ନୋଟିସ୍‍ କରିବା ସହ ସେମାନଙ୍କ ମତାମତ ଶୁଣିବା ପାଇଁ ଶୀର୍ଷ ଅଦାଲତ ଦିନ ଧାର୍ଯ୍ୟ କରିଛନ୍ତି  । ଆଜିର ଶୁଣାଣିବେଳେ ଇସ୍‍ମାଇଲ୍‍ ଫାରୁକି ମାମଲାରେମାନ୍ୟବର ଖଣ୍ଡପୀଠ ଯେଉଁ ରାୟ ଦେଇଛନ୍ତି ତାହା ସ୍ପଷ୍ଟ କରୁଛି ଯେ, ରାମ ଜନ୍ମଭୂମି ଠାରେ ମୁସଲିମ୍‍ମାନେ ମସ୍‍ଜିଦ୍‍ ନିର୍ମାଣ କରି ନମାଜ ପାଠ କରିବା ଦ୍ୱାରା ସେହି ସ୍ଥାନ ଯେ ମୁସ୍‍ଲିମ୍‍ମାନଙ୍କ ହୋଇଯିବ ଏହି ଯୁକ୍ତିକୁ ଅଦାଲତ ଅଗ୍ରାହ୍ୟ କରିଦେଇଛନ୍ତି  । କାରଣ ଅଦାଲତ କହିଛନ୍ତି ଯେ, ଯେ କୌଣସି ସ୍ଥାନରେ ନମାଜ ପାଠ କରାଯାଇିବ  । କେବଳ ମସଜିଦ୍‍ରେ ହିଁ ନମାଜ ପାଠ କରାଯାଇପାରିବ ସେଭଳି କୌଣସି ବିଦ୍ଧି ନାହିଁ  ।

Thursday, 15 March 2018

अयोध्या मामला, बकवास कर रहे श्री श्री रविशंकर

संतकबीरनगर| पुनः संशोधित गुरुवार, 15 मार्च 2018 (14:35 IST)
संतकबीरनगर। अयोध्या मसले का समाधान आपसी बातचीत के जरिये निकालने के लिए प्रयासरत आध्यात्मिक गुरु की बयानबाजी को बेतुका करार देते हुए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निगाह में अच्छा बनने की चाहत ने श्री श्री को ऊल-जुलूल बयान देने के लिए मजबूर किया है।

भारत को सीरिया बनाने संबंधी श्री श्री के बयान पर ज्ञानदास ने कहा कि आध्यात्मिक गुरु कोई साधु-संत नही हैं वह सिर्फ बकवास करते हैं औऱ सरकार के इशारे पर बोलते हैं। श्री श्री प्रधानमंत्री की निगाह में अच्छा बनना चाहते हैं। यह उनका आडंबर है। अयोध्या में मिलने आए थे मगर संतों ने उनको नकार दिया। हमने कहा कि जब मामला न्यायालय में चला गया है तो श्री श्री का कोई मतलब नहीं है।

उन्होने कहा कि केंद्र और प्रदेश में दोनों जगह भाजपा की सरकार है। अब मंदिर निर्माण में क्या दिक्कत है। उन्होंने कहा कि रविशंकर समझौते के नाम पर लोगों को मूर्ख बना रहे हैं। महंत ने कहा कि तीन हिस्से में बांटने के लिए 2010 में अदालत का एक निर्णय आया था जिस पर हम लोगों ने पहल की जिससे यह लग रहा था कि राम मंदिर बन जाएगा जिसमें सब कुछ हो गया था लेकिन अशोक सिंघल, विनय कटियार और राम विलास वेदांती इसमें बाधक बन गए। अब जो कुछ भी होगा न्यायालय से होगा।

धर्मगुरु ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनना ही चाहिए लेकिन ऐसा मंदिर नहीं बनना चाहिए जो खून की धारा से बना हो। ऐसा मंदिर बने जो दूध की धार से बना हो। इसे नेताओं ने उलझा रखा है। राम मंदिर के मुद्दे को जब तक राजनीति से अलग नहीं किया जाएगा तब तक राम मंदिर नहीं बनेगा और न ही तब तक देश का विकास नहीं हो सकता। (वार्ता)
http://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/ayodhya-sri-sri-118031500055_1.html